आचार्य रमेश आर्य
गुरुकुलीय शिक्षा, दर्शन-अध्ययन, वैदिक अध्यापन और डिजिटल माध्यम से निरन्तर ज्ञान-प्रसार की यात्रा।
दर्शनाचार्यमूल ग्रन्थ से जीवन तक
वैदिक गुरुकुल, हरिद्वार में शिक्षा तथा दर्शन-योग महाविद्यालय, रोजड़ (गुजरात) में दर्शन-अध्ययन के बाद ‘दर्शनाचार्य’ उपाधि। शिक्षा और सेवा की यात्रा में हरियाणा तथा गुजरात के विभिन्न संस्थानों में अध्यापन का अनुभव रहा है।
वेद, संस्कृत, योग, भारतीय संस्कृति और शास्त्र-अध्ययन के क्षेत्र में लगभग पन्द्रह से अधिक वर्षों का अध्यापन-अनुभव तथा आठ से अधिक वर्षों की डिजिटल पहुँच।
शास्त्र केवल पढ़ने की वस्तु नहीं; उसका अर्थ समझना, विचार करना और जीवन में उतारना ही अध्ययन की पूर्णता है।
अध्ययन का ढंग
मूल पाठ को क्रम से लेना, कठिन बात को सरल करना, प्रसंग को समझाना और फिर उसकी जीवनोपयोगिता स्पष्ट करना—ऋताभा की कक्षाओं की मूल दिशा यही है। ध्यान, मन्त्र-अभ्यास, रामायण, उपनिषद्, सत्यार्थप्रकाश, नीति और बाल-संस्कार को अलग-अलग विषय मानते हुए भी जीवन-निर्माण की एक समन्वित यात्रा के रूप में देखा जाता है।
ऋताभा क्या है?
ऋताभा एक स्वतंत्र वैदिक अध्ययन-पहल है। इसका उद्देश्य वैदिक शिक्षा, स्वाध्याय, शुद्ध जीवन, नेतृत्व, राष्ट्रहित और युवा-जागरण को आधुनिक डिजिटल माध्यम से सरल और व्यवस्थित रूप में पहुँचाना है। इसकी ध्येय-दिशा है—“आत्मोन्नति से लोककल्याण की ओर।”
आगे की दिशा
वर्तमान नियमित कक्षाओं के साथ भविष्य में योग, सांख्य, वेदान्त, न्याय, वैशेषिक, भगवद्गीता, चाणक्य नीति, ऋषि दयानन्द के ग्रन्थ और चारों वेदों का मन्त्र-आधारित स्वाध्याय क्रमशः जोड़ा जाना प्रस्तावित है।
